
आदमी बंदर है रोज़ जीने के लिये
करतब नया दिखाना पड़ता है
हँसता नहीं गुमसुम बैठा रहता
हँसाने के लिये उसे गुदगुदाना पड़ता है
ख़ुशी जो कभी मिलती तो ख़ुश रहने के लिये
उसे अपनों से छुपाना पड़ता है
रिश्ते नाते मजबुरी हैं निभाने के लिये
दोस्
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