बाप जीवित हो और किसीलम्बी बीमारी से ग्रसित ना हो बस यही काफ़ी है बच्चो के लिए।गुज़रे हुए बाप के बच्चों के हाथों से खुशियाँ यूँ फ़िसल जाती है जैसे हाथों से रेत।
बाप जीवित हो और किसीलम्बी बीमारी से ग्रसित ना हो बस यही काफ़ी है बच्चो के लिए।
गुज़रे हुए बाप के बच्चों के हाथों से खुशियाँ यूँ फ़िसल जाती है जैसे हाथों से रेत।