तुझसे मिलने की चाह मे तरसते है..
अब ये बादल कहाँ बरसते है....
छू लेते है जो तेरी यादो के दामन को.....
तो मेरे ख़्यालात दिन भर महकते है......
- धुआँ


तुझसे मिलने की चाह मे तरसते है..
अब ये बादल कहाँ बरसते है....
छू लेते है जो तेरी यादो के दामन को.....
तो मेरे ख़्यालात दिन भर महकते है......
- धुआँ