कल सुबह मिला मुझे वो आदमी

ज़मीन से काटा हुआ आदमी


शर्म में गाड़ा हुआ आदमी

मेरे हर्फ़ में लिखा हुआ आदमी


क्या हो गया था उसे?

क्यों था वो इतना डरा आदमी


सियासतों में पिसा आदमी

हक़ के लिए खड़ा आदमी


हमारी हँसी का सबब बन गया

सबके लिए जो लड़ा आदमी



-धुआँ