अब किसी से कोई वादा नहीं करता....

जब से तेरे वादों से ऐतबार उठा है.......

गुजर चुका है इश्क़ का कारवां कब का.......

फक़्त थोड़ा सा ग़ुबार बचा है !

-धुआँ