अब किसी से कोई वादा नहीं करता....जब से तेरे वादों से ऐतबार उठा है.......गुजर चुका है इश्क़ का कारवां कब का.......फक़्त थोड़ा सा ग़ुबार बचा है !
अब किसी से कोई वादा नहीं करता....जब से तेरे वादों से ऐतबार उठा है.......
गुजर चुका है इश्क़ का कारवां कब का.......फक़्त थोड़ा सा ग़ुबार बचा है !