तुमसे दूरियाँ कुछ इस कदर सह गया


तड़पा इश्क़ इतना कि आँख से बह गया


मैं उसके सामने टूट कर बिखरा बेइंतहा 


पर वो बस मुझे बस देखता रह गया


उसके हिस्से में आई तू, मेरे हिस्से में तेरी यादें 


और मैं चुपचाप बस हाथ मलता रह गया


बनाया था जो मिलकर इश्क़ का एक महल


लगी वक़्त की ऐसी ठोकर एक पल में ढह गया


सुनो तुम मेरी किसी बात का ग़ौर मत करना


मैं तो दीवाना हूँ दीवानगी में जाने क्या कह गया


-धुआँ