तेरे बिन चाँद भी मुझसे खफा है

शायद उसकी भी तेरे जैसी अदा है

रूठ जाता है बात बात पर ऐसे

जैसे एक तेरा हिस्सा उसमे बसा है

तेरे लिए लड़ सकता हूँ उस खुदा से भी मैं

क्योंकि तू शामिल मेरी हर दुआ में रहा है

देखना कही बढ़ ना जाए इतनी दूरी

कही नाम भी पुकारे तो लगे आवाज़ जुदा है


-धुआँ