शब ए फ़िराक में रंग ए उल्फत को जब भरते है....
सितारे तेरी यादो के, फ़लक दिल का मुकम्मल करते है
दिल सुनता है तमाम रात खामोशियों की सदा
छुप कर ज़माने से जब हम तन्हाइयों से बात करते है
खुशबू ए हर्फ़ बिखर जाती है फ़िज़ाओं में कू-ब-कू
करके याद तुझे जब हम सोज़-ए-सुख़न में ढलते है
-धुआँ
शब ए फ़िराक - जुदाई कि रात
फ़लक -आसमाँ
रंग ए उल्फत - प्यार का रंग
खुशबू ए हर्फ़ - शब्दों कि खुशबू
कू-ब-कू - चारो तरफ
सोज़-ए-सुख़न - लिखने का जूनून


