वो जो मेरा अपना था, अब अनजाना सा लगता है
मेरे इश्क़ का खाली हुआ पैमाना सा लगता है
इलज़ाम अगर आप देते है हम पर बेवफाई का
कबूल.. हम्हें तो ये भी आपका नज़राना सा लगता है
मैं नहीं जी सकता एक "पल" भी जिसके बिना
वो शख्श मुझ से बेगना सा लगता है
वो पहले अक्सर मिला करता था गर्मजोशी से
अब तो उसकी बातें नज़रे चुराना सा लगता है
-धुआँ


