मुझको ख़ुद मुझ से चुरा कर
फिर मुझ से इश्क़ करता
ख़्याल पहले मारता मेरे वो
फिर मुझे ख़ुद मुझ में दफ़न करता
ज़ुबान पर एक ताला एक दिल पर
एक ज़ेहन में, और एक ख़्याल पर
पर इतनी चाभियाँ वो किधर रखता
मैं क्या करुँ हालात मेरे ऐसे नहीं
किस से ज़िरह करता और किस से बहस करता
किया है इश्क़ उस से जैसी है वो
कुछ तो "धुआँ " तू अपने ख़्याल पर शर्म करता
-धुआँ


