चंद शब्दों में अपनी पहचान आपको बताता हूँमैं इतना सरल हूँ कि किसी को समझ नहीं आता हूँड़रा देती है कभी तो चाँद कि चाँदनी मुझकोऔर कभी - कभी तो मैं धूप में भी मुस्कुराता हूँ
चंद शब्दों में अपनी पहचान आपको बताता हूँमैं इतना सरल हूँ कि किसी को समझ नहीं आता हूँ
ड़रा देती है कभी तो चाँद कि चाँदनी मुझकोऔर कभी - कभी तो मैं धूप में भी मुस्कुराता हूँ