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मेरी पहचान


चंद शब्दों में अपनी पहचान आपको बताता हूँमैं इतना सरल हूँ कि किसी को समझ नहीं आता हूँ

ड़रा देती है कभी तो चाँद कि चाँदनी मुझकोऔर कभी - कभी तो मैं धूप में भी मुस्कुराता हूँ

— धुआँ
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