गुनाह-ए-इश्क़ है क़बूल मुझे, तू जो आकर कोई सज़ा तो करे
क़ैद तेरी ज़ुल्फो की भी मंजूर है, तेरी आँखे पहले रिहा तो करे
-धुआँ