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गुनाह-ए-इश्क़


गुनाह-ए-इश्क़ है क़बूल मुझे, तू जो आकर कोई सज़ा तो करेक़ैद तेरी ज़ुल्फो की भी मंजूर है, तेरी आँखे पहले रिहा तो करे

— धुआँ
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