रात गए जब तेरी याद सताती है
गुफ़्तगू चाँद से हो जाती है
बिखर जाती है चाँदनी ज़ेहन में
तेरी तस्वीर आँखो में उभर आती है
घिर उठते है अब्र तेरी यादों के
बारिश आँखों से बरस जाती है
लम्हात-ए-वस्ल अब मयस्सर कहाँ
मेरी बातें, मुलाक़ातो को तरस जाती है
-धुआँ


रात गए जब तेरी याद सताती है
गुफ़्तगू चाँद से हो जाती है
बिखर जाती है चाँदनी ज़ेहन में
तेरी तस्वीर आँखो में उभर आती है
घिर उठते है अब्र तेरी यादों के
बारिश आँखों से बरस जाती है
लम्हात-ए-वस्ल अब मयस्सर कहाँ
मेरी बातें, मुलाक़ातो को तरस जाती है
-धुआँ