सुबह से शाम तक मैं सोचता रहा...
शाम कि तन्हाइयाँ क्या रंग लायेगी
तेरा चेहरा दिखेगा क्या फिर चाँद में
चांदनी क्या फिर तेरी रंगत चुराएगी
-धुआँ


सुबह से शाम तक मैं सोचता रहा...
शाम कि तन्हाइयाँ क्या रंग लायेगी
तेरा चेहरा दिखेगा क्या फिर चाँद में
चांदनी क्या फिर तेरी रंगत चुराएगी
-धुआँ