सब से नज़रे बचाते चले आओ

ज़रा छुपते छुपाते चले आओ

ओढ़ कर घटाओं के पर्दे को

चाँद आधा दिखाते चले आओ

चिराग़-ए-दिल है रोशन इंतज़ार में

हम है पलकें बिछाते चले आओ

-धुआँ