"आसानी से पढ़ लेते है सब चेहरा मेरा

 तू मेरी आँखों में नज़र आती है"



अकेले बैठा-बैठा कभी मुस्कुराता हूँ

तो कभी तुझ से नाराज़ हो जाता हूँ

फिर थोड़ी देर बाद हवा को गले लगा कर

खुद ही मान जाता हूँ

तेरे कानो में प्यार की बातें धीमे से बोल कर

तुझे शर्माता हुआ सा पाता हूँ


आसानी से पढ़ लेते है सब चेहरा मेरा..

दो बात तेरी सुनता हूँ

दो अपनी बताता हूँ

फिर धीमे से तेरे माथे पर गिरी बालो की एक लट को

उंगलियों से अपनी हटाता हूँ

तेरी आँखों में देख कर अपना चेहरा

कितना हैरान सा रह जाता हूँ


आसानी से पढ़ लेते है सब चेहरा मेरा..

तेरे हाथों को अपने हाथों में लिए

किसी सपने में खो जाता हूँ

तेरी उंगलियों को गिनता हूँ

तेरे हाथों की लकीरों में अपने आप को ढूंढ़ता हूँ

तेरी कलाई के कंगन की तुलना चाँद से करके 

चाँद को एक बार फिर से जलाता हूँ


"आसानी से पढ़ लेते है सब चेहरा मेरा

 तू मेरी आँखों में नज़र आती है".


-धुआँ