वो मेरा महबूब लौटा सको.. तो आ जाना

रस्म-ए-उल्फ़त निभा सको.. तो आ जाना


तुम्हारे इंतजार में ताका करेंगे राहो को

तुम मुड़ कर आ सको.. तो आ जाना


ना पुकारेगे कभी तुमको भूलकर भी अब

तुम मुझको ना भुला सको.. तो आ जाना


तुम्हे तो आदत है अपनी हर बात मनवाने की

इस दीवाने को मना सको.. तो आ जाना


सुलग कर हो जायेगी ये आतिश भी "धुआँ"

तुम फिर इश्क़ लगा सको… तो आ जाना

-धुआँ