पुरानी दिल्ली के
किसी गली में
किसी चाय की दुकान पर बैठे
सिगरेट की धुएं से
तुम्हारी तस्वीर बनाने की कोशिश को
ये बारिश हर बार नाकाम कर देती है
एक पुराने घर के दरवाजे के पास
हर रोज़ देर तलक बैठना
और फिर चले जाना
बहुत हीं खूबसूरत होता है
यहां से उठना और चले जाना
लेकिन हर बार उठना और चले जाना
खूबसूरत नहीं होता
किसी शायर के ज़िंदगी से
ख़्वाब का चले जाना
किसी घोंसले से
चूजों का चले जाना
किसी तालाब से
मछलियों का चले जाना
किसी घर से
मां बाप का चले जाना
किसी मां बाप के
बच्चों का चले जाना
बसंत के मौसम में
कोयलों का चले जाना
किसी गली से
महबूब का चले जाना
यार! सच में बड़ा बुरा है
किसी का ज़िंदगी से चले जाना
लेकिन यूं तेरे गुमसुम रहने से अच्छा है
तेरा चले जाना
ठीक है दोस्त
अब वक्त है हमारे चलने का
थोड़ी देर रुको
फिर तुम भी चले जाना।
© विकास गोंड


