बादल कभी गरजे कभी सुबकते रहे

हम सो नहीं पाये

और वो रात भर बरसते रहे


एक एक बूँद के साथ वो लाये

एक एक लम्हा

जिनके लिये हम अब तक तरसते रहे


लम्हा वो जिसे भुलाना था मुश्किल

दिल था उदास

बनके अश्क़ पलकों पे सजते रहे


भीग चुका था जिस्म पूरी तरह से

ख़ुद के आंसूऔं से

दिखाने को ज़माने को हम हँसते रहे


आज आई बारिश की बूँदे तो पता चला

मन तो है आज भी बच्चा

पता नहीं क्यों अब तक बचते रहे


बादल कभी गरजे कभी सुबकते रहे

हम सो नहीं पाये

और वो रात भर बरसते रहे


एक एक बूँद के साथ वो लाये

एक एक लम्हा

जिनके लिये हम अब तक तरसते रहे