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मेरा राम अलग

मेरा राम अलग , मेरी राह अलग , 

मेरा काम अलग , मेरी चाह अलग , 


बस उसके मन की हो जाये,

चाहे घाम रहे, चाहे छाव रहे,

बस मनमोहन की हो जाये, 

मन चोट लगे या घाव रहे, 


मेरा राम अलग , मेरी राह अलग , 

मेरा काम अलग , मेरी चाह अलग , 


तू दर दर के यूँ पिस्ता है,

न गेहूँ तू, ना है तू चना,

हर घाव से पानी रिसता है,

जाने किस माटी से तू बना, 


मेरा राम अलग , मेरी राह अलग , 

मेरा काम अलग , मेरी चाह अलग , 


ना धन की रही , ना तन की रही , <

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