आज जो कुछ बूंदे पड़ी थी, कुछ कुछ तुम्हारे जैसी थी.. बादल उमड़ उमड़ के आये, कुछ देर बरसात हुई... जमीं की तपिश मिटने का कुछ इमकान हुआ, पर अब चारो तरफ उमस है और फिर से धुप खिली है... ऐसा ही कुछ हाल मेरे दिल की जमीन का भी है.