ज़मीं से जुड़ा,तो ज़मीं ने उठा के आसमां पे बिठा दिया

ज़मीं को भूला तो आसमाँ ने फिर से जमीं पे गिरा दिया


छोटी छोटी थी हसरतें,तो हुई हासिल खुशियां तमाम

बेइंतहा हुए अरमाँ तो मीठे सपनों ने साथ छोड़ दिया


छोटे छोटे कदमों से तय किया था फासला दूर तलक

छलांगे लंबी होने लगी तो कदमों ने साथ छोड़ दिया


हर कदम बाबस्ता ज़मीं से ,मंजिलों पर कायम नज़र

राह की मुश्किलें समझी तो मुश्किलों ने साथ छोड़ दिया


ताउम्र खुशियों की फ़िराक़ में फिरता रहा मैं दर बदर

खुशियों की चाहत छोड़ दी तो गमों ने साथ छोड़ दिया