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वो आलौकिक प्रेम कहाँ है.....

Here is a poem on love
Seeking true love which is boundless with no specific definition..just pure love for mankind..love just for the sake of love..

विष के प्याले में प्रेम निहारे
बौराई गिरिधर को पुकारे
तप, त्याग, सर्वस्व समर्पण
मीरा का वो प्यार कहाँ है
कान्हा का वो आशीष कहां है

कान्हा को बसाये अंतर्मन में
बहे प्रेम की अविरल सरिता
निःस्वार्थ,निष्काम,नश्वर, नैसर्गिक <

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