कितने रंग सलोने तेरे, कितनी भोली तू तितली रानी
नादान बहुत है फिर भी लेकिन करती रहती है शैतानी
जब चाहे चंचल हो जाये जब चाहे चुप से छुप जाये
डाल डाल कभी पात पात ,करती है अपनी मनमानी
मासूमियत ताक़त है तेरी,भोलापन तेरी आदत है
तेरे रंग सुकून दें मन को, दिल जीते तेरी नादानी
थोड़े रंग उधार दे मुझको,थोड़ी अपनी दे नादानी
तेरे जैसे ही मासूम रहूँ और तेरे जैसे बनूँ सयानी
तू जो अपने रंग दे मुझको मैं रंग दूँ दुनिया ये सारी
सब दर्द छुपे रंगों में तेरे सारी दुनिया हो जाए दीवानी

