तेरी खुशबुओं में सना करवटें बदलता रहा
रात भर मैं चाँद की सिसकियां सुनता रहा
सर्द ठंडी रात बस अंगारों सी दहकती रही
रात के धुएं में,दिल का भी दम घुटता रहा
सारा ज़माना था गुमशुम नींद की आगोश में
यादों के बवंडर में मैं भटकता फिरता रहा
शायद हमारी फिक्र में तुम भी कहीं मायूस हो
रात भर यही सोचता ,खुद को समझाता रहा

