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सूर्य को अर्घ्य.. सूर्य 6/40, 40 Poems in 40 days

अपनी देह जलाकर 

सूर्य बांटता है तपिश

मिटाता है अंधकार 

असह्य वेदना में भी

मुस्कुराता है हर दम

बांटता है खुशियां


सूर्य की वेदना को 

आत्मसात कर मैंने 

आज अर्घ्य चढ़ाया 

उनके परमार्थ पर

गौरवान्वित हो 

उनके आशीष के लिए

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