रस्सी चाहे रत्नजड़ित हो

खूंटा चाहे सोने का हो

 बंधी गाय का बन्धन तो

 उतना ही दयनीय रहेगा


 हीरों से चाहे सजा हो पिंजरा

गले में हो मोतियन की माला

क़ैद में पंछी का वरस्सीर्णन तो

वैसे ही अकथनीय रहेगा


चारदीवारी से महलों की 

सारा शहर नज़र के नीचे

ज़मीं से नाता जुड़े बिना तो

जीवन  ये असहनीय रहेगा


आँखोँ में उल्हास न हो

जीने की दिल में प्यास न हो

बिना आस के जीवन तो

यूँ ही विस्मरणीय रहेगा