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सीमा पर गश्त के बीच..33/40. . 40 Poems in 40 Days

बर्फीली चोटियों पर 

सीमा पर गश्त के बीच 

गर्म चाय से उठती भाप 

अहसास दिलाती है 

रिश्तों की गर्माहट का 

बहुत सलीके से 

होंठों से लगा कर  

वो भेजता है  

गर्म बोसे का पैग़ाम

सुदूर कहीं

किसी बहुत अपने को

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