क्षण क्षण चिंता ना कर बंदे
कण कण में बसते हैं राम
जीवन मरण तो इक सपना है
बस, सच है दाता का नाम
जप या ना जप, नाम तू उसका
वही सवांरे, सबके काम
क्षण क्षण चिंता ना कर बंदे
कण कण में बसते हैं राम
उसके द्वार खुले हैं हर पल
चाहे सुबह हो चाहे शाम
सुमिरन कर तू नाम का क्या है
राम हो, शिव हो, या घनश्याम
क्षण क्षण चिंता ना कर बंदे
कण कण में बसते हैं राम
शिव ने गटका विष वो सारा
कालिया नाग भी कृष्ण से हारा
इस विष का भी कण कण हर लेंगे
कण कण में जो बसे हैं राम
क्षण क्षण चिंता ना कर बंदे
कण कण में बसते हैं राम

