अपनी शोहरतों के शोरोगुल से गुलज़ार न हो ।
तन्हाइयों में अक्स पर फख्र हो तो ज़िक्र कर ।।
दौलतों के ढेर में दफन है तेरी खुशियां तमाम ।
कोई ज़िन्दगी तूने ख़ुशहाल की तो ज़िक्र कर ।।
ताउम्र का रोना क़ि क्या कुछ नहीं नसीब तुझे ।
ज़िन्दगी मिली है , उसे जी पाया तो ज़िक्र कर ।।
दूसरों की नाकामियों की फिक्र करना छोड़ दे ।
तेरी कामयाबियों का कहीं शोर है तो ज़िक्र कर ।।
सिर्फ खुद के लिए तूने जी ली ज़िन्दगी तमाम ।
खुदा के लिए जीने का हौसला है तो ज़िक्र क़र ।।

