मां के प्यार जैसी ही थी, पापा की फटकार भी

डांट में डर भी था ,पर, थी बहुत असरदार भी


आंख दिखाने से चुपके से दुबक जाते थे हम

मगर थोड़ी सी मुस्कान से इतराने लगते थे हम


मां के पल्लू से हर दम ही चिपके रहते थे हम

पर एक पल पापा न दिखे तो डर जाते थे हम


भरपूर प्यार था दिल में कभी जताया ही नहीं

हम ही जिंदगी थे उनकी कभी बताया ही नहीं


बचपन में उनका प्यार समझ नहीं पाए थे हम

दुनिया की ठोकरों से उबरे तो समझ पाए हम


हर ठोकर से पहले ही हमें बचा लेना उनका

सुरक्षा कवच सा था उंगली का छल्ला उनका


जिंदगी की हर ठोकर पर जरूर याद आते हैं

मुझे हौसला देने को पापा अब भी मुस्कुराते हैं



              भरपूर प्यार के साथ

               पापा को समर्पित।

Happy Father's Day