मंदिर के बाहर ये जो लंबी कतार है
उनमें से ईश्वर से कुछ को ही प्यार है
कुछ को लाती है पेट की भूख यहां
उन्हें तो बस पूरी हलवे का इंतजार है
कितने ही लोभी लालची भी हैं यहां
जिन्हें ईश्वर से न लगाव है न प्यार है
ईश्वर उनके लिए बस एक जरिया है
और मंदिर बस सिर्फ इक व्यापार है
लेकिन कुछ हैं ईश्वर सर्वस्व है जिनका
जिनके लिए यही घर है यही संसार है
उन्हें ईश्वर में ही दिखती है हर खुशी
उनका तन मन हमेशा ही गुलजार है

