तेरे प्रेम की ओढ़ चुनरिया, 

फिरती हूं मैं मारी मारी

बनी फिरती हूं मीरा तेरी, 

मेरे तुम कान्हा गिरधारी


क्या समझोगे क्या जानोगे 

बौराने में सुकूं है कितना

तुमको भी तो कहां पता है 

मैं तुम पर कितनी बलिहारी


रखो अपने तौर तरीके 

ताज ओ ओहदे सब रहने दो

रखो सारी खुशियां अपनी,

मैं खुश तेरे दुख की मारी


तेरा खुद से है प्रेम सकल,

 मेरी  है तुझसे प्रीत अमर

तुम अपने में मगन कहीं, 

मैं मीरा सी मगन मतवारी