सिर्फ कुछ पलों का ही सिकंदर है तू
फिर कोई और लिखेगा मुकद्दर तेरा
हदों को लांघ कर क्या मिलेगा भला
हदों के पार भी है वो ही मुकद्दर तेरा
बदस्तूर चलेगी ये दुनिया तेरे बगैर भी
शायद ही कहीं होगा नामोनिशान तेरा
दो पल को तू खुद को खुदा मान भी ले
तीसरे ही पल खुदाई मांगेगी हिसाब तेरा

