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क्षमादान छोड़ो हे शंकर..21/40. 40 Poems in 40 Days

क्षमादान  छोड़ो हे शंकर

तुम खोलो त्रिनेत्र तुम्हारा

वरदान की इच्छा त्यागो शंभु

विध्वंसक हो विध्वंस करो


छोड़ोगे गर भस्मासुर को

भस्म करेंगे जग वो सारा

जो मानव बन बैठे हैं असुर

उन असुरों का संहार करो


वरदान की इच्छा त्यागो शंभु

विध्वंसक हो विध्वंस करो


काल बनो हे महाकाल तुम

दया न हो अब धर्म तुम्हारा

पापियों से मुक्त करो ये धरा

उठा त्रिशूल अब वार करो

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