वो जो तुझे छू कर निकला,मौत का साया था

शुक्र कर खुदा का जिसने तुझे बचाया था


तेरी राह के काटें तो सारे वो ले गया चुनकर

तेरी राह को फूलों से उसने ही सजाया था


तुझे है गुमाँ तूने छू लिया आसमाँ यूँ ही

उसने मगर अपने काँधों पे तुझे उठाया था


वो जो न दिखा न सुनाई दिया था कहीं

हर शय हर कायनात में मगर समाया था


मेहरबानियों का उसकी दे न पाओगे हिसाब 

न जाने कितनी बार तुम्हें तुमसे ही बचाया था