कोई गुजारता कैसे ये जिंदगी
जैसे हमने गुज़ारी है
कोई संवारता ये जिंदगी कैसे
जैसे हमने संवारी है
सहरा में गुल खिलाने के
ख्वाब सजाए हमने
कौन सजाता ये जिंदगी ऐसे
जैसे हमने सजाई है
तेरे गमों को सीने से लगाए
खुशबुओं की तरह
कौन बिखेरता मुस्कुराहटें यूं
जैसे हमने बिखराई है

