आज कोने में सजा मेरा गुलदस्ता टूटा
सबसे अज़ीज़, सबसे जुदा ,सबसे खूबसूरत
पता नहीं ये महज़ इत्तफ़ाक थाया यूँ ही मेरे अंदर का डर
उसकी खनक के साथ मुझे
कई रिश्तों के टूटने का सा अहसास हुआ
टूटे बिखरे टुकड़ों को जोड़ने की कोशिश में
कई ज़ख़्म ले बैठा, तमाम दर्द संजो बैठा
बिखरे कांच के ढेर को करीब से देखा तो
कई रिश्ते दम तोड़ते नज़र आये
रिश्तों की गणित में उलझ सा गया हूँ
अपने हिस्से का नफा ढूढ नहीं पाया हूं
न ही कहीं नुकसान की वजह नज़र आई
टूटे बिखरे टुकड़ों के बीच
ज़िन्दगी के मायने ढूढ रहा हूँ
काश कोई मुझे कांच के टुकड़ों को
जोड़ने का हुनर समझा सके

