कच्ची दाल और अधपके चावलों से

मुगलई पकवान तक का ये सफर

इतना आसान नहीं,

पर इतना मुश्किल भी नहीं


सतरंगी ख्वाबों और इंद्रधनुषी सपनों से

धरती पछाड़ सच्चाई तक का ये सफर

थोड़ा मुश्किल तो है

पर नामुमकिन भी नहीं


हार कर माथा पीटना आसान है और

 मुश्किलों से जीतना थोड़ा मुश्किल

मंज़िल की चाह तो बड़ी आसान है

 पर उसकी डगर थोड़ी मुश्किल 


सपना देखना भी ज़रूरी है

और सपनो को पूरा करने की शिद्दत भी

सतरंगी ख्वाब भी हक़ीक़त हैं और

बेरंग पन्नों को रंगों की चाहत भी


शाही पकवान की महारत चाहिए

तो कच्ची दाल से भी निभाना होगा

सतरंगी सपने देखने हैं तो

 कुछ बेरंग पन्नों को भी रंगना होगा


तुमसे पहले कितनों ने यही राह चली

कुछ चलते रहे कुछ डगमगा गये

कुछ थक हार कर बैठ गए, पर

ज्यादातर मंज़िल तक पहुंच ही गए


तू भी इस मुश्किल डगर से न डर

राह पकड़ और चलता चल

थोड़े सपने चुन थोड़ी हकीकत देख

सपनों को हकीकत की राह दिखा


मुश्किल है तो मुश्किल ही सही

 बस राह पकड़ और चलता चल

मंज़िल को अपनी निगाह में रख

बस राह पकड़ और चलता चल