जब तुम तुम ना रह पाओ
मैं भी खुद सी ना रह पाऊं
जब चाहो तुम मुझसा होना
और मैं तुम जैसी बन जाऊं
प्रेम की पावन परिणति हो ऐसी
आंख खुले तो तुमको पाऊं
पलकों में भी तुम्हें सजाऊं
बंद हों या खुले हों जब भी
तुम्हारे नयनों में मैं इतराऊं
प्रेम की पावन परिणति हो ऐसी
मेरे नाम में तुम बस जाओ
तुम्हारे नाम में मैं रस जाऊं
नाम पुकारे कोई तुम्हारा
मैं दौड़ी भागी चली आऊं
प्रेम की पावन परिणति हो ऐसी
मैं चाँद में तुम्हें निहारूं
अंखियन में मैं तुम्हें उतारूं
पियूँ जब जल तुम्हारे नाम का
तुम्हारे प्रेम का अमृत पाऊँ
प्रेम की पावन परिणति हो ऐसी
हर मौसम में प्रेम की पींगे
झूलें साथ साथ हम यूं ही
तुम झूला दो मेरे सपनों को
तुम्हारे सपने मैं अपनाऊं
प्रेम की पावन परिणति हो ऐसी
wandering _gypsy _rns
20 Oct 22

