रात कभी रुकती नही

 दिन भी गुज़र जाता  है

कितना भी गहरा हो बादल

बरस के निकल ही जाता है


हर वक़्त गुजर जाता है


कभी दिन के उजाले सा

रात के अंधियारे सा कभी

वक़्त बुरा हो या भला

बस यूँ ही निकल जाता है


हर वक़्त गुजर जाता है


कुछ पलों का होता है मेहमां 

तूफ़ाँ भी और आफ़त भी 

थोड़ी सी तबाही देकर 

थक  के चला जाता है 


हर वक़्त गुजर जाता है


रख खुद को संभाल कर तू 

न डर न घबरा इन आफ़तों से 

वक्त कितना भी बुरा हो 

बसर हो ही जाता है 


हर वक़्त गुजर जाता है