चलो आज एक नई रसोई में,थोडा कुछ ज़ुदा करें
थोड़ी हमारी गरीबी सेकें, कुछ तुम्हारी अमीरी परोसें
थोड़ा मैं सिखाऊँ तुमको, कुछ तुम भी बयां करना
तुम थोड़ी गरीबी और, हम भी कुछ अमीरी चख लें
खुले आसमान के नीचे, चान्दनी को महसूस करें
तुम्हारे गर्म लिहाफ़ से लिपटे, मीठे कुछ अहसास समेटें
तुम्हारे लिए भी सब नया, हमारे लिए भी अजीब है
तुम्हारे सब करीब है, हमारा तो सिर्फ नसीब है
अजब है तेरी दौलत भी,मायूसी को कम नहीं करती
मेरी गरीबी भी अक्सर मुझसे मुस्कराहटें छीन लेती है
अपने अपने में हम , कितने ज़ुदा ज़ुदा से हैं
फिर भी ज़िन्दगी कुछ तुझसे,कुछ मुझसे छीन लेती है
चलो कुछ मिल बाँट कर, थोड़े गम गलत कर लें
मेरी थोड़ी मुस्कराहटें ढूंढे, थोड़ा तेरी तन्हाइयों से लडें

