खो गया मेरा रिश्ता कहीं
रह गई उलझने कई
छूट गया बहुत कुछ कहीं
रह गई बातें कई
उसने मुझे जाना नहीं
उसने मुझे पहचाना नहीं
बस सोच में हूं यहीं
क्या चाहा था मैंने उससे
जो मुझे मिला नहीं
उसने मुझे जाना नहीं
उसने मुझे पहचाना नहीं
कई गुजरे दिन
कई गुजरी रातें यूँही
रह गई चुभन कई
उसने मुझे जाना नहीं
उसने मुझे पहचाना नहीं।।
#Vidyaश्री


