जहाँ भी तू जाएगा
जिस राह तू गुजरेगा
मेरा ही नज़ारा तुम्हें, नज़र आएगा
तुम्हें मेरा ज़िक्र सताएगा...
तुम्हें मेरा ज़िक्र सताएगा...!
जो नहीं समझ आए थे मेरे ज़ज्बात तुम्हें,
जो नहीं समझ आए थे मेरे अल्फाज़ तुम्हें,
ये वक़्त तुम्हें समझाएगा
तुम्हें मेरा ज़िक्र सताएगा..
तुम्हें मेरा ज़िक्र सताएगा...!!
जो नहीं जानी मेरी अहमियत तुमने
जो नहीं जानी थी मेरी काबिलियत तुमने
ये ज़माना तुम्हें बतलाएगा
तुम्हें मेरा ज़िक्र सताएगा..
तुम्हें मेरा ज़िक्र सताएगा..!
जो नहीं दिखी थी मेरी सच्चाई तुम्हें
जो नहीं दिखी थी मेरी अच्छाई तुम्हें
एक दिन आएगा
तुम्हें यकीन जब आएगा
तुम्हें मेरा ज़िक्र सताएगा..
तुम्हें मेरा ज़िक्र सताएगा...!!
~Vidyaश्री


