सुनले ये अरज मेरी
हे प्राणों के नाथ..!
सांची है प्रीत मेरी
साँचा है मन का भाव
राधा सा प्रेम मिले
मीरा सा पीर हो जाऊँ
रुक्मिणी सा मान मिले
लक्ष्मी सा वरदान हो जाऊँ,
सांची है प्रीत मेरी
साँचा है मन का भाव
सुनले ये अरज मेरी
हे प्राणों के नाथ...!!
#वासुदेव
#Vidyaश्री


