निश्छल, निःस्वार्थ और सच्ची निष्ठा का भाव ही प्रेम का सही रूप है।यही परम सत्य हैयही परम ब्रह्म है।
निश्छल, निःस्वार्थ और सच्ची निष्ठा का भाव ही प्रेम का सही रूप है।
यही परम सत्य हैयही परम ब्रह्म है।