ये लम्हें ठहर जाए यहीं

रेत की तरह फिसल ना जाए कहीं

रोक सको तो रोक लो इन्हें

फ़िर ना ये मंज़र आए कभी


गुजर जातें हैं ये लम्हें यूंही

बाद याद आतें हैं कहीं।।



#Vidyaश्री