Poetry 1 min read 778.2K reads

लम्हें


ये लम्हें ठहर जाए यहींरेत की तरह फिसल ना जाए कहींरोक सको तो रोक लो इन्हेंफ़िर ना ये मंज़र आए कभी

गुजर जातें हैं ये लम्हें यूंहीबाद याद आतें हैं कहीं।।

— #Vidyaश्री
Read more Earn more Learn more