क्यूं बनूं मैं राधा तुम्हारी
क्यूं बनूं मैं मीरा तुम्हारी
ये विरह का भाव
नहीं सहना मुझे
बिन तुम्हारे
नहीं जीना मुझे
बना लो मुझे रुक्मिणी तुम्हारी
तुमको समर्पित हो जाऊँगी
चरणों की तुम्हारे धूल बन जाऊँगी
साए में तुम्हारे सिमट जाऊँगी
बिन तुम्हारे जीना पाऊँगी।।
#Vidyaश्री


