अस्तित्व


क्या कोई दीप बिन बाती जला है?

शक्ति बिना शिव का अस्तित्व भला है?

क्या डाली बिना पुष्प समर्पित हुआ है?

नारी बिना पुरुषत्व क्या अर्जित हुआ है?


क्यों कोसती है दुनिया बेटियों को कोख में?

दरिंदगी का परचम क्यों सरेआम हुआ है?

क्यों भूलते हैं हम काली स्वरूप को

नारियों का शोषण जब जब आम हुआ है।


अनूसुया का ज्ञान है,ये कल्पना उडान‌ है

मनु की गर्जना,ये किरणों सी शान‌है

सुष्मिता सी शोखी ,तीज्न का राग है

अस्तित्व में हमारे आग ही आग है


अस्तित्व का व्दंद क्यों चाहिए हमें?

नारी का हाथ नारी है साथ बढ़ना हमें

सदियों के वाकछल का संताप क्यों करें?

रख स्वयं पर विश्वास

नये युग का सर्जन करें।

@विदुषी