1.)
कहां गया वह सत्य अहिन्सा कहां गये प्यारे गांधी
कभी फिरंगी ज़िससे डरते बही कलंकित है खादी
बादी तो है जेल के अन्दर शाह बना है प्रतिबादी
आज दासता से बदतर हैं फिर केसी यह आजादी
2.)
बोलने पर ना कोई प्रतीबंध है
मौन से फिर भी हुआ अनूबंध है
बांध में पड़ने लगी है अब दरार
टूटता ही जा रहा तटबंध है
बोलते हो खामखाँ क्यू बीच में
यह मेरा उनका निजी सम्भंध है
बीहढ़ों में चीख भी है बेअसर
मौन रहने दो तुम्हे सौगंध है
3.)
सांप मर गया, चलो अच्छा हुआ
लेकिन उस आस्तीन का क्या करें
जो आज भी विषैली है